बिखरा पड़ा है सामन ढुढती हु कही कोई
मनचाही याद ही मिल जाए ll
बिखरा पड़ा है वजूद ढुढती हु कही कोई
मनचाही याद ही मिल जाए ll
सफर मे चल पड़े है कारवा के साथ साथ
बिना कुछ सोचे समझे हम l
बिखरा पड़ा है बिस्तरा ढुढती हु कही कोई
मनचाही याद ही मिल जाए ll
पुराने घर की दिवलो पे टंगी हुई तस्वीर
देखकर सोचते रह जाते हैं l
बिखरा पडी है यादे ढुढती हु कही कोई
मनचाही याद ही मिल जाए ll