आओ जरा तुम पास कि तुम्हें सुनाऊ मैं एक नई गजल
शब्दों का है सुखाड़ क्योंकि भावनाओं का नहीं कदर।
इंसान बन गया है मशीन संवेदनाओ का नहीं है जगह।
सोचता हूँ हो कोई ख़ास जिसे थोड़ी तो हो मेरी फिकर।
बैठे पल भर मेरे साथ समझे क्या है मेरा हाल ए जिगर।
कुछ वक्त मिले साथ जब हमें दुनियाँ की न हो खबर।