नकुल व सहदेव : - ये 33 देवताओं में से 2 अश्विनीकुमारों के अंश से उत्पन्न हुए थे। ये 2 अश्विनी कुमार थे- 1. नासत्य और 2. दस्त्र। सहदेव त्रिकालदर्शी था। उसने महाभारत युद्ध के होने और इसके परिणाम की घटनाओं को पहले से ही जान लिया था लेकिन श्रीकृष्ण ने उसे इस घटना को किसी को भी बताने से इंकार कर दिया था।
कृपाचार्य : - रुद्र के एक गण ने कृपाचार्य के रूप में अवतार लिया।
शकुनि : - द्वापर युग के अंश से शकुनि का जन्म हुआ।
धृतराष्ट्र और पांडु : - अरिष्टा के पुत्र हंस नामक गंधर्व धृतराष्ट्र तथा उसका छोटा भाई पाण्डु के रूप में जन्मे।
विदुर : - सूर्य के अंश धर्म ही विदुर के नाम से प्रसिद्ध हुए।
कुंती-माद्री : - कुंती और माद्री के रूप में सिद्धि और धृतिका का जन्म हुआ था।
गांधारी : - मति का जन्म राजा सुबल की पुत्री गांधारी के रूप में हुआ था।
रुक्मणी-द्रौपदी : - राजा भीष्मक की पुत्री रुक्मणी के रूप में लक्ष्मीजी व द्रौपदी के रूप में इंद्राणी उत्पन्न हुई थीं।
अभिमन्यु चंद्रमा के पुत्र वर्चा का अंश था। मरुतगण के अंश से सात्यकि, द्रुपद, कृतवर्मा व विराट का जन्म हुआ था। अग्नि के अंश से धृष्टधुम्न व राक्षस के अंश से शिखंडी का जन्म हुआ था।
विश्वदेवगण द्रौपदी के पांचों पुत्र प्रतिविन्ध्य, सुतसोम, श्रुतकीर्ति, शतानीक और श्रुतसेव के रूप में पैदा हुए थे।
दानवराज विप्रचित्ति जरासंध व हिरण्यकशिपु शिशुपाल का अंश था।
कालनेमि दैत्य ने ही कंस का रूप धारण किया था।
इंद्र की आज्ञानुसार अप्सराओं के अंश से 16 हजार स्त्रियां उत्पन्न हुई थीं।
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