Gujarati Quote in Motivational by Naranji Jadeja

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क्‍या आप जानते हैं महाभारत में कौन किसकेे अवतार थेे??

यह सभी नायक किसी ना किसी परम पुरूष के अवतार थे, कोई देवताओं का तो कोई गंधर्व का तो खुद भगवान नेे भी कृष्ण अवतार लेकर इसमें भाग लिया था। ...

भारत का प्राचीन इतिहास ग्रंथ 'महाभारत' कई रहस्यों से भरा हुआ है। इसका प्रत्येक पात्र अपने आप में एक रहस्य है। क्या आप जानते है महाभारत में कौन किसका अवतार था महाभारत एक बहुत ही महान युद्ध को दिखाता है, जो धर्म और अधर्म के बीच में हुआ था।

विजय धर्म की हुई थी। महाभारत में वैसे तो बहुत पात्र हैं पर कुछ महान पात्र भी हैं जिन्हें महाभारत का नायक कहा जाये तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। यह सभी नायक किसी ना किसी परम पुरूष के अवतार थे, कोई देवताओं का तो कोई गंधर्व का तो खुद भगवान नेे भी कृष्ण अवतार रखकर इसमें भाग लिया था।

महाभारत में जितने भी प्रमुख पात्र थे वे सभी देवता, गंधर्व, यक्ष, रुद्र, वसु, अप्सरा, राक्षस तथा ऋषियों के अंशावतार थे। उनमें से शायद ही कोई सामान्य मनुष्य रहा हो। महाभारत के आदिपर्व में इसका विस्तृत वर्णन किया गया है। आओ जानते हैं कि कौन किसका अवतार था।

भगवान श्रीकृष्ण : - चौंसठ कला और अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों से पूर्ण श्रीकृष्ण को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। माना जाता है कि वे अपने पिछले जन्म में मनु थे।

बलराम : - महाबली बलराम शेषनाग के अंश थे। जब कंस ने देवकी-वसुदेव के 6 पुत्रों को मार डाला, तब देवकी के गर्भ में भगवान बलराम पधारे। योगमाया ने उन्हें आकर्षित करके नंद बाबा के यहां निवास कर रही श्रीरोहिणीजी के गर्भ में पहुंचा दिया इसलिए उनका एक नाम संकर्षण पड़ा।

बलवानों में श्रेष्ठ होने के कारण उन्हें बलभद्र भी कहा जाता है। कृष्ण के बड़े भाई होने के कारण उन्हें 'दाऊजी' कहा जाता है। बलरामजी का विवाह रेवती से हुआ था। महाभारत युद्ध में बलराम तटस्थ होकर तीर्थयात्रा के लिए चले गए। यदुवंश के संहार के बाद उन्होंने समुद्र तट पर आसन लगाकर अपनी लीला का अंत कर लिया था। उनके शौर्य की गाथाएं अनेक हैं।

भीष्म : - कृष्ण के बाद भीष्म का नंबर आता है, जो महाभारत के प्रमुखों में से एक थे। 'द्यु' नामक वसु ने ही भीष्म के रूप में जन्म लिया था। वसिष्ठ ऋषि के शाप व इंद्र की आज्ञा से आठों वसुओं को शांतनु-गंगा से उत्पन्न होना पड़ा। 7 को तो गंगा ने नदी में बहा दिया जबकि 8वें वसु 'द्यु' जिंदा रह गए वहीं भीष्म थे जिनका प्रारंभिक नाम 'देवव्रत' था।

द्रोणाचार्य : - भीष्म के बाद द्रोणाचार्य को सबसे अहम माना जाता है। देवगुरु बृहस्पति ने ही द्रोणाचार्य के रूप में जन्म लिया था।

अश्वत्थामा : - उपरोक्त के बाद अश्‍वत्थामा सबसे अहम है। गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र थे अश्‍वत्थामा। पिता- पुत्र की जोड़ी ने मिलकर महाभारत में कोहराम मचा दिया था। अश्‍वत्थामा को महादेव, यम, काल और क्रोध के सम्मिलित अंश से उत्पन्न किया गया था।

Gujarati Motivational by Naranji Jadeja : 111068251
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