जीवन पानी है,
बहता जाता है,
कल कल बल बल,
कभी पत्थरों को काटते,
कभी संकराओ से निकल के,
देश के हिसाब से रंग बदलता,
जीवन पानी है,
बहता जाता है।
आसमान से टूट कर,
बूंद बन चल पड़ता है,
अपने जैसे को लेकर,
एक बड़ा धार बनाता है,
वो भी कुछ पल चलते है जो साथ आए थे,
फिर आगे चलकर,
बिखर बूंद बन जाता है,
जीवन पानी है,
बहता जाता है।
-Krishna Katyayan 2018