जो बीत गई सो बीत गई
बीते से अब डरना क्या?
अनछुए को छूना क्या?
पीछे के प्रति अटको मत,
भावनाओं में भटको मत
साकार हुए अरमानों में ,
गति की डोर थाम लो यारो।
ज़ी लो वर्तमान में हंसकर,
संकल्पों से आगे बढ़ना
सीखो अपने अतीत से,
पर उससे जुड़ना मत यारों
नव विकास से डरना क्या ?
जो बीत गई सो बीत गई।।
सभी साथियों एवं पाठकों को
नव वर्ष मंगलमय हो।।
।। तारा गुप्ता।।