एक अन्त हीन.कन्दरा के मध्य ।
चुपचाप ।
आखँ अपनी पूरी शिद्दत से ।
खोजती है प्रकाश की एक किरन।
याद करना चाहती है
पूर्व के प्रकाशमय क्षण
लेकिन यह कया प्रकाश अपने साथ ।
किसे लारहा है ।
यह मेरा पडोसी अब्दुल ।
जिसे कुछ लोगो ने मार दिया था ।
जब यह बेचने जा रहा था उसे
मैं इस प्रकाश से बचना चाहता हूँ।
मैं यहीं ठीक हूँ ।