कविता
तुमसे बातें करते - करते
इतना थक गया हूँ मैं कि
अब तुम्हारी ही गोद में
सो जाना चाहता हूँ ।
कितना इन्तजार करूँ
मेरी किसी बात का तुम
उत्तर ही नहीं देती ।
देखती हो मेरी तरफ बादलों के बीच से
लगता है ऐसा मुझे
न जाने क्यों
उदास तुम भी बहुत हो ।
छितिज छुआ है तुमने
पार जाने के लिए
हाथ मेरा भी पकड़ लेती तो
समझा लेती वो सारी बातें
जो इतनी देर से समझाना चाह रहा हूँ मैं ।
क्या अब कभी भी
नहीं आएगा वो दिन
जब मेरे कहने से पहले ही
बोल देती थीं तुम्हारी आँखें
वो सारी बातें
जो कहना चाहता था मैं ।
थक गया हूँ मैं
बिछा दो गोद अपनी
सोना चाहता हूँ मैं भी उसमें
तुम्हारे साथ अपनी बात
तुम्हें कहने के लिए ।
सुरेन्द्र अरोड़ा ( 21/12/2018 )