क्या तुम थे कभी?
या बस तुम्हारी परछाईं थी,
क्योंकि धूप जब ख़तम हुई,
तुम भी उसके साथ ही कम होते गए,
और फिर शाम होते होते,
तुम्हारा नामो निशान ही मिट गया,
फिर हर सुबह तुम आ जाते हो,
और शाम को मिट जाते हो,
क्या तुम थे कभी,
या बस तुम्हारी परछाईं थी?
© Krishna Katyayan 2018