एह दोस्त तुम क्या जानो के मेरे क्या हो तुम,
मैं प्यासा हूँ तो सावन की घटा हो तुम,
मेरा चमन मेरी बाहर हो तुम,
मेरे दिल के मुख्तार हो तुम,
ख़िज़ाँ में बहार हो तुम,
मेरे दिल का करार हो तुम,
जिसका कोई सानी नहीं वो दिलदार हो तुम,
जिससे मुझे प्यार मिला ऐसे यार हो तुम,
मेरा गुलशन मेरा गुलज़ार हो तुम,
मेरे खैर खवा मेरे ग़मख्वार हो तुम,
मेरा पहला और आखरी प्यार हो तुम,
"पागल" को आज़माते क्यों बार बार हो तुम।
✍?"पागल"✍?
मुख्तार - वकील / सलाहकार
खिजाँ - पतझड़
सानी - बराबरी / जोड़
खैर - मजबूत / कुशल
खवा / कंधा
ग़मख्वार - दिलासा देना