कितना अच्छा लगता है जब हम किसी के पास हो, और जब वो नींद में ही और हम उसे निहारते हो, उसकी सांसे जो बो बार बार ले के छोड़ रहा हो, बीच बीच में चहरे पर हल्की सी मुस्कान, जैसे प्रतीत होता हो कि उसने शायद ख्वाब में हमे ही देख कर मुस्करा दिया हो और हम उसे ऐसे मुस्कुराते हुए देख कर खुद अपने होटों पे हल्की सी मुस्कान बिखेर लेते है । फिर अचानक उसे लगता है कि हम उससे दूर जा रहे है तो आधी नींद में ही कहता है " जाना नहीं, जाना नहीं" । उसके ऐसे लफ्जों का उत्तर बस इतना ही की हम हमेशा आपके साथ है, आपके पास है ? ।
उसे यू ही नींद में निहारना, और बस निहारना , कितना अच्छा लगता है । उसकी आंखे जो बन्द तो है, लेकिन फिर भी ऐसा लगता है जैसे वो भी एक टक मुझे देखे जा रहा है । आवाज़ खामोश है लेकिन हमारी बातों का कारवां कहीं दूर तक जा पहुंचा है । ये उसे भी पता है उसके ख़्वाबों मे, मैं ही हूं और मेरे सामने वो । नापने को तो दूरियां बहुत है उनके दरमिया, लेकिन उनके बीच में फासला बिल्कुल भी नहीं । कितना अच्छा है उस यों निहारना ।।??