फूल टहनियों से टूटने के बाद, जुड़ा नही करते,
निकल गए जो आगे वो ख्वाब मुड़ा नही करते।
कट गए गर पर वो पँछी फिर से उड़ा नही करते,
मिट्टी बन गए हो पत्थर फिर भी पानी मे घुला नही करते।
किस्तों में बट गए सितारे फिर से टिमटिमा नही करते,
ठोकर खाकर टूट जाए जो, कभी वो पथ्थर भुला नही करते।
खलिश खलती हो, वो कभी बना खुदा नही करते,
इन्सा बिखर जाए तो भी जज्बात भुला नही करते।