प्यार नहीं कर सकते हैं
तो प्यार के बारे में सोच सकते हैं,
साथ-साथ नहीं चल सकते हैं
तो साथ के बारे में सोच सकते हैं,
उड़ नहीं सकते हैं
तो उड़ान के बारे में सोच सकते हैं।
तालियां न सुनायी दें
तालियों के बारे में जान तो सकते हैं,
घर तक आ न सकें
घर का खाका खींच तो सकते हैं,
ठीक से जी न सकें
जीने के बारे में विचार रख तो सकते हैं,
चलने की शक्ति न हो
चलने के आनन्द पर बहस छेड़ तो सकते हैं।
सत्य पर न चल सकें तो
सत्य को आदर्श बना सकते हैं,
ईमानदारी से मुलाकात न हो
तो उसकी प्रशंसा कर सकते हैं।
तैरना न आता हो
तो तैराकों को देख तो सकते हैं,
आकाश को छू न पायें
लेकिन आकाश को देख तो सकते हैं,
पहाड़ों पर चढ़ न सकें
पर ऊँचाई का अनुमान तो लगा सकते हैं,
रास्ते न बना सकें
पर रास्तों जैसी लकीर खींच तो सकते हैं।
**महेश रौतेला