अब वो महेफिल सजने कि
कोई वजाह हि नहि हे
कयोकि अब वो बाते भी तो नहि हे
अब उस लापरवाहि मे भी
मझा नहि हे कयोकि
अब वो आपकी हमारे लिये
कि परवाह हि नहि हे
अब वो अपनेपन का
सुकुन भि नहि रहा
कयोकि हमारी परेसानी समज
सके वैसे आप हि नहि रहे
अब वो आप के साथ
चलने कि जिद भि नहि हे
कयोकि अब हमारी
मंजिल भि तो एक नहि रहि
- कविता पटेल