मेरी इश्क़ भी पुराने रम जैसी थी,
धीरे धीरे चढ़ी,
जब पहली बार देखा उन्हें,
बिल्कुल उस ओल्ड मोंक के बोतल जैसी ही थी,
अंदर से सालो पुरानी,
पर ऊपर से बिल्कुल फैंसी,
पहली नजर में ही भा गई,
मुझे लगा शायद अफोर्ड ना कर पाऊंगा,
ना ही पचा पाऊंगा,
पर फिर जैसे जैसे दीदार बढ़ता गया,
हल्का हल्का नशा भी चढ़ने लगा,
पुराने ओल्ड मोंक की तरह।
© Krishna Katyayan 2018