देखी है मैने भी इश्क में
बिन मौत की सियासत तेरी
ठुकरा दिया था तूने यह कह कर की
तेरी औकात क्या है
आज देख कलम और स्याही से खड़ी
विरासत मेरी
नोट - हाँ मै गुस्सा हूँ तुजसे और हमेशा रहूंगा
तेरी अब यही सजा है की मै अब तुजसे ऐसे ही मिलूँगा
Wrote by Author Pawan Singh Sikarwar
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