इक जलक
इक पल को तेरी सांसे हुई रवाँ
उस पल को धड़का ये दिल ज़वान
गुज़री जो युह पास से
खवाबों का मनज़र बन गया
मेहक ती तेरी उस लेहर मे
लचक थी तेरी उस नज़र में
कया कहुँ ऐ दिलरुबा
केहकशी का आलम बन गया
कदम जो तेरे रुके नही
चाहत जो तुझसे जुड़ी रही
मिलना था हमारा अधुरा सा
फिर मिलेंगे ये वादा रहा
- कुमार