#LoveYouMummy
प्यारी माॅं,
तुम्हारी याद मुझे हरपल सताती है, अपने आॅंचल से वो मेरे आॅंसू का पांेछना, स्नेह स्पर्श से मेरी पीड़ा को हर लेना, स्वयं से पूर्व मेरी भूख मिटाना आदि। पर मैं माॅं बनकर ही समझ पाई हॅूं कि खुद के दर्द को कैसे अपने ही बच्चे से छुपाकर मुस्कुराना कठिन है। सबके लिए तत्पर रह अपने लिए लापरवाहियाॅं कितनी सहजता से कर लिया करती थी। पर, काश ! वो बचपन वापस मिल जाता माॅं,आज फिर तुम्हारे ही आॅंचल की छाया में सुकून की नींद की इच्छा है, विचलित मन तो देखो 50 की उम्र में भी आॅंचल वाली गोद की चाहत हुई है। मैं वारी जाऊॅं।
तुम्हारी परछाईं