आजकल चर्चा में......
शेक्सपियर ने कहा था 'नाम में क्या रखा है'? लेकिन जनाब नाम में बहुत कुछ रखा है, ऐसा न होता तो सालों से राजनीतिक दल ‘नाम’ की राजनीति कभी नहीं करते......
नाम बदलने की ये परंपरा और खेल कोई नया नहीं है। इसमें कांग्रेस सहित बसपा, सपा और आजकल भाजपा, सभी शामिल हैं।
वैसे तो शहरों के नाम बदलने से कुछ खास नहीं बदलता। लोग कागजों में अवश्य नाम बदल लेते हैं, लेकिन लोगों के जहन में वहीं नाम रहते हैं जो उनकी जुबान पर चढ़ जाए। करीब दो वर्ष पहले गुड़गांव का नाम बदलने के बाद आजकल इलाहाबाद के नाम बदलने के बड़ी चर्चा है। लेकिन यह न पहली बार हैं और न ही आख़िरी बार।
आइये देखे जरा, अभी तक देश के कुछ मुख्य शहरों और उनके बदले हुए नामों पर एक नजर।
1. बड़ौदा - वडोदरा
2. त्रिवेन्द्रम - तिरुवनंतपुरम
3. बॉम्बे - मुंबई
4. मद्रास - चेन्नई
5. कोचीन - कोच्चि
6. कलकत्ता - कोलकाता
7. पौंडिचेरी - पुड्डुचेरी
8. कॉनपोर - कानपुर
9. बेलगाम - बेलगावि
10. इंधूर - इंदौर
11. पंजीम - पणजी
12. पूना - पुणे
13. सिमला - शिमला
14. बेनारस - वाराणसी
15. वाल्टेयर - विशाखापत्तनम
16. तंजौर - तंजावुर
17. जब्बलपोर - जबलपुर
18. कालीकट - कोझिकोडे
19. गौहाटी - गुवाहाटी
20. मैसूर - मैसूरू
21. अल्लेपे - अलप्पूझा
22. मैंगलोर - मंगलुरु
23. बैंगलोर - बंगलुरु
24. गुड़गांव - गुरुग्राम
बरहाल यहां ये जानना दिलचस्प रहेगा कि कांग्रेस पार्टी जितनी पुरानी पार्टी है, उसकी नाम बदलने की परंपरा भी उतनी ही पुरानी रही है। गांधीजी और नेहरूजी के नाम पर रखे गए अधिकांश शहर उद्धाहरण के तौर पर देखे जा सकते है। और इनमें सब से विशेष रहा है, कांग्रेस शासनकाल में बदला गया विश्व प्रसिद्द कनॉट प्लेस का नाम जिसे जनवरी 1996 में नाम बदलकर राजीव चौक कर दिया गया। ये अलग बात है कि अधिकतर लोग आज भी इसे कनॉट प्लेस ही बोलते आ रहे हैं।
/वीर/