पहेला सलाम हमेशा 'माँ' के लिए आरक्षित है
जिसने हमें ये खूबसूरत ज़िंदगी दी हैं ....
पर दूसरे पे इस 'ज़िंदगी' का हक़ बनता है......
जो एक माँ की तरह बहलाती है... सहलाती है ...
पर ज़रूरत पड़े गलतियों का एहसास कराती हैं
और कठोर सजा भी सुनाती हैं !!!
- देवांशु पटेल ???