ईमानदारी हमारी और तुम्हारी एक सी है,
हम सूरज चुराना चाहते हैं,
तुम प्रकाश चुराना चाहते हो।
तुम पहाड़ चुराना चाहते हो
हम नदी चुराना चाहते हैं,
तुम पुल चुराना चाहते हो
हम सड़क चुराना चाहते हैं।
वह संसद चुराना चाहता है
हम मत चुराना चाहते हैं,
तुम राजधानी चुराना चाहते हो
हम देश चुराना चाहते हैं,
तुम विद्यालय चुराना चाहते हो
वह शिक्षा चुराना चाहता है,
ईमानदारी हमारी और तुम्हारी एक सी है।
***महेश रौतेला