'हाल-ए-दिल यूँ उन्हें सुनाया गया
आँख ही को ज़ुबाँ बनाया गया
ज़िन्दगी की उदास रातों को
आपकी याद में सजाया गया
इश्क़ की वो भी इक मंज़िल थी
हर क़दम पर फ़रेब खाया गया
दिल पे एक वह भी हादसा गुज़रा
आज तक दिल से न छुपाया गया
लाख तूफ़ाँ समेट कर या रब
किसलिए एक दिल बनाया गया'❤❤