'दो अक्टूबर' दो शब्द
*****************
भारत जननी के बेटों ने, भारत मां का हर्ष बढ़ाया
दो अक्टूबर दो शब्दों ने भारत भू का मान बढ़ाया।
एक 'शास्त्री'दूजे'गांधी'ने फैलाई खुशियों की आंधी।
'प्रेम' 'एकता' दो शब्दों की राखी जिन्होने थी बांधी।
देश प्रेम, आदर्शों हित जिसने अपनी खुशियां त्यागी।
सत्याग्रह आंदोलन कर,दो डग से दुनिया नापी
दो शब्दों का जाल बिछा कर, अंग्रेजों को था भरमाया।
दो पग जिधर चल पड़ते सैकड़ों चरण उधर उठ जाते।
दो नयन जिधर उठ जाते लाखों शीश वहां झुक जाते।
उस बापू की जय बोलो, जिसने देश स्वतंत्र कराया।
'हे' 'राम' दो शब्द कह,जो चिरनिंद्रा गोद समाया
जय बोलाजिसने'किसान'की,जय बोला जिसने 'जवान' की।
दो जन की जय कहने वाले शास्त्री थे नहीं डरने वाले।
मंदिर मस्जिद गिरजा द्वारा,हर मज़हब उन को था प्यारा।
अचल अडिग गर्वोन्नत माथा,कण कण गाथा गौरव गाथा।
दो युग पुरुषों ने दो वाक मंत्र से शुचिसत्य पंथ बनाये।
अपना गगन होअपनी मही अपनी हों सुर सरितायें ।
हुआ है दो अक्टूबर पावन, हम जन्म पर्व मनायें।
।।तारा गुप्ता ।।