मां की याद
तेरे हाथों का वह नरम स्पर्श आज भी याद है
तेरे चेहरे का वह प्यारा सा हर्ष आज भी याद है...तेरे हाथों का वह नरम
जब भी मुझे लगा कि मैं गलत हूं
हमेशा तूने सच को समझाया है
जब मेरा मन उदास हो जाता था
तुमने ही उसको हंस के बहलाया है
चाहे कितने भी भगवान मिल जाए
उन सब से ऊपर तेरा आशीर्वाद है...तेरे हाथों का वह नरम
जब भी मैंने कुछ नया करना चाहा
कैसा भी हो बस तू ने सराहा
डर लगता था मुझे खुद से-जहां से
तूने हमेशा साथ दिया है हमारा
कोई आए अगर मेरी जिंदगी में
उससे भी कहूंगा वह तेरे बाद है...तेरे हाथों का वह नरम
कितने भी मिल जाए दोस्त मुझे
चाहे कितना सफल में हो जाऊं
आखिर में तो मैं बस तेरी
गोद में सर रखकर सो जाऊं
भगवान ने पता नहीं कैसे बनाया है
तूझसे ही जहां मेरा आबाद है...तेरे हाथों का वह नरम