#kavyotsav
◆'खास एहसास'◆
क्या है यह प्रेम...?
जो कभी धुले कपड़ों की खुशबू में मिलता है
तो कभी दिखता है अधपकी रोटियों में ..
कभी रोती आंखो से छलकता है
तो कभी झलकता है अठखेलियों से
कभी नैनों के खुमार के रूप में उभरता है
तो कभी दबे होंठों की सिसकियों में कसकता है
इमली के बीजों में अन लिखा प्यार
चॉकलेट के रैपर में दिखता मनुहार
सूखे गुलाब और पत्तियों की वीरानी में
होती है उन महकते पलों की यादें बेशुमार ...
वो साथ में खाना खाने के पल खास
हाथों से एक दूजे को खिलाने के एहसास
शायद यही अनमोल एहसास है प्यार ...
....
प्यार ..
जो कभी हाथ जोड़कर खेलती हसरतों में मिलता है
तो कभी मिलता है इश्क में डूबे खतों में...
कभी दिल में मासूम बच्चे सा
तो कभी डूबा हुआ नफरतों में ..
....
कभी इसके अनेक रुप हो जाते हैं
महसूस करने वाले इन में खो जाते हैं
कभी उंगलियां चटकाते अल्हड़ प्रेमी होते हैं
जो एक दूसरे की चिंता में रात भर नहीं सोते हैं
प्यार ....
जो किसी और का नाम होठों पर देख, चिढ़ जाता है प्यार जो अपने दिल की घुटन को ,कभी कह नहीं पाता है
प्यार ...
जो हर अनकही बात समझ जाता है
आंखों के कोरों में बहता प्यार समेट लाता है
क्या है यह प्रेम ?
जो कभी मौत को सामने देखकर भी,
हंसना चाहता है चार दिन के लिए ..
जैसे तेल की अंतिम बूंद तक ,
जलना चाहते हों दिए...
कैसा दिलकश होता है यह संगीन एहसास
छोटी-छोटी बातों से बन जाता है कोई खास
◆◆◆
-कविता जयन्त श्रीवास्तव
इलाहाबाद उत्तर प्रदेश
30/09/18