#KAVYOTSAV
...बस माँ के लिए।।
बन के प्रेम का सागर
था, करुणा से जिसनें सींचा
सुलाती लोरियाँ गा कर
वो जिससे मैने सब सीखा
उसकी बेतहासा प्यार पा कर
दिल खुद को खुश नसीब कहता है
बस माँ के लिए कुछ करने को जी करता है
बस माँ के लिए कुछ करने को जी करता है।।
वो चिंता में हि रहती थी सदा मेरे लिए
करती मिन्नतें भगवान के फेरे किये
न लगने पाये मुझको धूप यूं छाया किया
रख के सर गोंद में जिसके बुने सपने नये
उसकी कुर्बानियों पर ख़ुद कुर्बा होने को जी करता है
बस माँ के लिए कुछ करने को जी करता है
बस माँ के लिए कुछ करने को जी करता है।।