#KAVYOTSAV
वो तेरी हर ख्वाहीश की ईबादत करना,
और तेरी खुशियों को दुआओ में शामिल करना,
वफा में सच्चाई हमारी,
और खुदगर्जी तेरी तहजीब है।
तू जानता ही नही,
कि तू कितना खुशनसीब है।।
वो टूटे तारे से भी तेरी वफाओ को मांग लेना,
और तेरा मुजे उसी तारे की तरह तोड देना।
तूने समझा ही नही,
कौन तेरा हबीब और कौन रकीब है।
तू जानता ही नही,
कि तू कितना खुशनसीब है।।
रात,चाँद,ख्वाब,जूगनु,खामोशी और ये साँसे,
इन साँसो से भी अनमोल, जनाब! आप बन बैठे।
ईश्क में उसूलो का टूटना भी,
हमारे लिए अझीझ है।
तू जानता ही नही,
कि तू कितना खुशनसीब है।।
वैसे तो खौफ बहोत है, हर बशर से हमे,
पर तेरे किस्से सूनाने में, ये दिल बडा ही बेखौफ है।
कुछ पल ही सही,
पर तेरा रहबर बनना ही झहनसीब है।
तू जानता ही नही,
कि तू कितना खुशनसीब है।।
कभी तेरे एहसास पर कविताएँ लिख देना,
तो कभी तेरे कागज पर तेरा चेहरा बन जाना।
मेरी इस कलम से,
तेरा रिश्ता भी कुछ अजीब है।
तू जानता ही नही,
कि तू कितना खुशनसीब है।।
आज तू जो हमे देखकर यूँ नजरे चुराता है,
लगता है हमारा होना, तेरी अना को तकलीफ पहुँचाता है।
माना हम तुजसे थोड़े गरीब,
मगर ईन्सानियत में अदीब है।
तू जानता ही नही,
कि तू कितना खुशनसीब है।।
और सून,
हमें तुजसे कोई शिकवा हो, ऐसा कभी नही होगा,
दिल कहता है, कही न कही हम गलत और तू सही होगा।
तेरा वो तबस्सुम करना,
अब भी इस दिल के करीब है।
तू जानता ही नही,
कि तू कितना खुशनसीब है।।
आज भी हमें 'मीरा-सी-मोहब्बत' पर यकीन होना,
टूट जाना मगर इस पाकीजगी को न छोडना।
हमें किसी मुनासीब से मिलवाने की,
शायद खुदा की ये तरकीब है।
तू जानता ही नही,
कि तू कितना खुशनसीब है।।
-पियु खंभायता