#kavyotsav
बेटा या बेटी
बेटा ! अगर है वंश..
बेटी ! भी है आप ही का अंश ,
अगर बेटे से है मान...
बेटी ! से भी है..सम्मान ,
बेटा ! गर है अभिमान...
बेटी ! से है स्वाभिमान ,
बेटा ! है गुड़ अगर...
तो बेटी है शक्कर ,
मिठास तो दोनो ही में है...भरपूर मगर
बेटा ! है गर जान...
बेटी ! से है..ये सारा जहान ,
बेटा ! गर वंश का है बीज...
बेटी ! से ही है उसकी बेल ,
बेटा ! गर मुक्ति का है मार्ग...
बेटी ! का दान भी है...महादान ,
बेटा ! गर घर का है चिराग...
बेटी ! भी करती है अंधेरे घरों को रोशन ,
बेटे पर , अगर है विश्वास...
बेटी ! को भी है ...आपसे वही आस ,
बेटा ! अगर है फक्र...
बेटी ! से ही है ये संसार चक्र ,
बेटेे बिन अधूरे है...यदि व्रत सारे...
बेटी बिना भी त्यौहार कब हुए है...पूरे ,
यदि बेटा ! है तिलक...
तो बेटी भी है रोली ,
दुर्गा , बिन कैसी अष्टमी...
और लक्ष्मी , बिन...कैसी दिवाली !
बेटा ! गर है अभिनंदन...
बेटी ! भी है भक्ति और वंदन ,
इसीलिये मत भूलिए...!!
बेटा अगर है वंश...
तो बेटी भी है...आपका अंश ।।
©नेहाभारद्वाज