#काव्योत्सव
साया
रहता हूँ हर पल साथ तेरे, साथ रह कर भी हूँ खामोश तुझसे
मैं साया हूँ तेरा, हां मैं साया हूँ तेरा
जुदा ना हो सकूं तुझसे, जुदा ना कर सके तू मुझे
मैं साया हूँ तेरा, हां मैं साया हूँ तेरा
तनहाई मैं तेरे साथ हूँ, हर खुशी में तेरे साथ हूँ
बारिशों मैं भीगा तेरे साथ हूँ, गर्मियों मैं जला तेरे साथ हूँ
हर मौसम मैं तेरे साथ रहा, किया न कभी शिक़वा मैंने
मैं साया हूँ तेरा, हां मैं साया हूँ तेरा
बिना किसी बंदिशों के तू आज़ाद है, खुले चमन का पंछी है
मैं बंधा हूँ तेरी इक डोर से, जिसमें आज़ादी की एक ही उम्मीद है
ना जाने कैसा रिश्ता है तुझसे, उम्र भर का साथ है तुझसे
मर के भी तेरे साथ रहूँगा
मैं साया हूँ तेरा, हां मैं साया हूँ तेरा
- कुमार