#काव्योत्सव
मन की बात (भावना)
मन की बात कहूंगी तुमसे
आओ बैठो बातें कर लूं।
कठिन समय में अपने छूटे,
मन के सारे शब्द हैं रूठे,
अनुभव की देहरी पर आकर
थोड़ा धीरज संग्रह कर लूं,
नहीं दुखाया हृदय किसी का,
थोड़ी सी तितिक्षा कर लूं।
आओ बैठो बातें कर लूं।।
बिखरी हुई कहानी अपनी
अंतर्मन में है लिख रखी।
कहने को उद्धत हूं तुमसे,
पहले संशय से बाहर तो निकलूं।
हो संतुलित करूं साधना,
सारे शिकवे गिले भुला दूं।
सोच सहम रहा है मन,
थोड़ी और प्रतीक्षा कर लूं
आओ बैठो बातें कर लूं।।
काल चक्र के चलते पहिये संग,
जीवन हर पल है नयी चुनौती ।
सुनी थी एक कहावत हमने,
दुख बांट लो तो कम हो जाता।
कितनी बातों में उलझ गया मन,
मन से मन की बात समझ लूं।
अपनी बातें कहने से पहले,
बातों की गहन समीक्षा कर लूं।।
आओ बैठो बातें कर लूं।।
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तारा गुप्ता