।। प्रेम।। # कव्योत्सव
नमी उगी कोपल की तरह
नये नये संबंध
उगते हैं फलते फूलते हैं
फिर एकाएक
सूखे पत्ते की तरह
झर जाते हैं,
किन्तु मेरे और तुम्हारे संबंध,
जो कभी उगे थे फले फूले थे।
आज सूखकर भी जुड़े हुए हैं,
कभी टूट जायें तो तुम
शोक मत करना
शाख हो तुम तो
तुम्हें तो नये संबंध मिलेंगे,
सूखा पत्ता तो मैं हूं,
जो टूटकर धूल में मिल जाने के सिवा,
कोई चारा ही नहीं ।
लेकिन फिर भी मैं इंतजार करूंगी,
हवा का झोंका आये,
और मुझे उड़ाकर तुमसे कहीं दूर ले जाये।
क्योंकि,
सूखकर जुड़े रहने की पीड़ा से,
टूटकर गिर जाने का दर्द,
कहीं बहुत कम है।.....
तारा गुप्ता
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