#kavyotas
॥ ओ! मेरे भगवान ॥
मेरी सुधियों के है सारे टूट गए अरमान ।
किसको छोडू रख लूँ किसको दिल इतना नादान ।
कल तक तेरी तरह तकूँ मैं भटकूँ सुबह शाम ,
ना जाने तुम कहां छुपे हो ओ !मेरे भगवान ।
मन तो माटी की गागर है गढे उसे कुम्हार ,
तिनका- तिनका जोड़ के सर ओढ़ लिया आसमान ।
ऊंच- नीच औंर जाति -धर्म में बट गया इंसान ,
आपस में अपनों को लड़ा कर खेल रहा है शैतान ।
जिसको अपने लहू से सींचा वह निकला मक्कार
अपने ही कर्मों का लेखा फिर भोगेगा इंसान ।