रिश्ता #
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जब मैंने प्यार भरे आंचल से दुलराया है।
तब - तब तुमने मेरे सपनों को चटकाया है ।
कहते हैं प्रतिदान प्रेम का प्रेम हुआ करता है।
इसके बिन नीरस जीवन उथली मन-सरिता है।
तुम्हे ज्ञात है यह सच, किंतु दंभ ने भरमाया है।
तब - तब तुमने मेरे सपनों को चटकाया है।
अपने सिवा कहीं कोई नहीं तुम्हारे आगे।
कोई मूल्य नहीं साथी का रिश्ते कच्चे धागे।
बंधन टूटे, रिश्ता टूटे तुम्हें यही मन भाया है।
तब-तब तुमने मेरे सपनों को चटकाया है ।
प्रेषिका
डॉ अमृता शुक्ला