#kavyotsav poem रिश्ते
रिश्ता
कुछ रिश्ता इस माटी से
क्यूँ जनम लिया इस आँगन मे
बहुत सोचा, पर समझ न आया
खाली हाथ आये, खाली हाथ जायेंगे
फिर संसार की मोह-माया किसलिये
बहुत सोचा, पर समझ न आया
ना कुछ तेरा , ना कुछ मेरा
फिर क्यों करना तेरा-मेरा
बहुत सोचा, पर समझ न आया
जन्म-जन्मांतर का है ऋण चुकाना
कर्मों का है हिसाब चुकता करना
बहुत सोचा,कुछ थोडा समझ आया
है गहरा रिश्ता इस माटी से
तो जनम लिया इस आँगन मे
फिर जिन्दगानी का मजा आया