#Kavyotsav
आंखे नम है ना जाने क्यो?
ना कोई गम है
ना मर्म है
फिर भी मेरी आँखें नम है
क्या समझू
इस बात को तूने जो ढाया सितम है
सितम समझू या कुछ और समझू?
तू ही बतादे
क्योंकि खुद ना जाने कही गुम हूं मैं
शायद थोड़ा चुप भी हूं ,
जिंदगी से बाते भी थोड़ी काम करता हूं
खुदसे मिलने की कोशिश भी बहुत करता हूं
मगर
फिर वापस आ नही पाऊंगा इस बात से डरता हूं ,
कोशिश खुद को भुलाने की भी करता हूं लेकिन भूल नही पाता हर वक़्त अपनी बेबसी तमासा देख मैं खुद ही नजर आता ,
धड़कने जोर जोर धकडती है
धड़कने जोर जोर से धड़कती है
तू मेरे साथ साथ नही
इस बात से
मेरी धड़कने भी सुबकती है ,
क्या कहूँ?? क्या समझाऊ ??
लिखूं क्या अपनी दासता?
बताऊ क्या अपनी हस्ती ?
जिसको चाहा था इस कदर उसने ही जलाई मेरी दिल की बस्ती
किसके आगे हम अपने आंसू बहाय
किसको दुखडा हम अपना सुनाये
है कोई ??
जो हमारी स्तिथि को समझ को समझ पाए।
मोहहब्बत कि थी कोई गुनाह नही जिसकी सजा मिल रही है बिना सुनवाई
लगता है तुमसे बात करूं
चाहे एक बार करू
लेकिन बात तो करू