#kavyotsav
बिकते रिश्ते
इस दलाली की दुनिया में क्या नहीं बिकता,
हर दिन बिकता एक नया रिश्ता।
पैसों की आँधी में हो गए इतने अंधे,
रिश्तों को भी बना लिए अपने धंधे।
जो रिश्ते कभी हुआ करते थे अनमोल,
भरी महफिल में लगते है आज उनही के मोल ।
क्या फर्क पडता है माँ बाप के प्यार से,
सोचते है ईमान बङेगा तो सिर्फ रकम बढ़ाने से।
इतने मसरूफ हो गए जोड़ने में नोटो की गद्दी,
की बेच ही डाली सारी यादों की रद्दी ।
इस दौलत की हवा मे ऐसे उलझ गए,
की सभी कि खैरियत लेना भी भूल गए।
क्या मां की ममता, यारो की यारी,
पैसे की दौड़ में सब बेच डाली।