#kavyotsav
ग़ज़ल (फ़ासिक़)
शब-ए-फ़ुर्क़त मे कर मुझे तुम याद पूछना,
तुम हाल मेरा मरने के मेरेे बाद पूछना,
जब भी मिले फ़ुरसत तुम्हे अपने ज़ुल्फ़ संवारने से,
तब पूछना तुम हाल-ए-दिल-ओ-रूदाद पूछना,
गर तुम चाहो लगाना हिसाब हद-ए-दर्द का मेरे,
तुम दिल से मेरेे अपने सीतम ला-तादाद पूछना,
मैंने तेरे हुक़ूक़ मे कभी की क्या हक़-तल्फ़ी,
हक़ बस मेरा हि क्यों बाकी रहा,ऐ हम-ज़ाद पूछना,
क्यों क़ैद मै ता-उर्म रहा बस ख़्यालों मे तेरे,
किआ तूने भी ना मुझे क्यों आज़ाद पूछना,
शब-ए-महताब तुझसे जब रूठ जाएंगी नींदें,
तूने कैसे था किया मेरे ख़्वाबों को बरबाद पूछना,
बात करने की एक ऐसी भी तेरी ग़ौर-तलब है,
तूने कितनी मर्तबा सुनी मेरी फ़रियाद पूछना,
एक व'आदा ही तो था और तुझसे निभाया न गया,
क्यो करता रहा मै तेरे व'आदे पर ऐत्माद पूछना,
क्या मैं ही था वो 'सादिक़',क्या मै ही था वो फ़ासिक़!
जनाज़े पे किसके है घर तेरा आबाद पूछना।
©Sadique