#MERAKRISHNA
मंदिर में बसे तो भगवान, गोपियों संग रास रचाए तो रास रचैया, माखन चोरी से खा ले तो माखन चोर, छल करे तो छलिया, अर्जुन, सुदामा संग मित्रता निभाते कृष्ण सखा रूप में हैं। वैसे तो कृष्ण के 101 स्वरूप हैं मगर मुझे कान्हा के उस रूप ने भरमाया है जब अर्जुन के सारथी बन उन का पथ प्रशस्त किया था।
कर्म के बिना कृष्ण अधूरे हैं और कृष्ण के बिना कर्म अधूरा है। यह तो स्वयं सारथी रूप कृष्णा के ही वचन हैं, इसीलिए मेरा कर्म ही मेरा कृष्णा है या यूँ कहें कि कृष्णा ही मेरा कर्म है।
नीलिमा कुमार