#MERAKRISHNA
कृष्ण सहज मन के भावों पर आधिपत्य करने वाले सरल भाव वाले भगवान हैं जो जनमानस के हृदय में एक अमिट स्थान रखते हैं जो हर भाव को अपना आश्रय प्रदान करते हैं कृष्ण की उपासना सगुण निर्गुण दोनों रूप में कर भक्ति का सही मार्ग साधा जा सकता है गुण अवगुण न देख कर अपने शरणागत को स्वीकारने वाले कान्हा के बालरूप को और उनकी मनमोहिनी नटखट हरकतों,प्रेमिल भाव और शरणागत वत्सल स्वभाव को सूरदास जी ने मन की आँखों से निहार कर अपने पदों में वर्णित किया है
चरन कमल बंदौ हरि राई ।
जाकी कृपा पंगु गिरि लंघै आंधर कों सब कछु दरसाई॥
बहिरो सुनै मूक पुनि बोलै रंक चले सिर छत्र धराई ।
सूरदास स्वामी करुनामय बार-बार बंदौं तेहि पाई ॥१॥