कविता - तुझी सोबत
----------------------
तुझी सोबत खरी
रिमझिमत्या सरी
चिंब चिंब भिजावे
मी तूझ्या सवे ....
पावासात एकदा तरी ..
तुझी सोबत जसे फुल
मना पडे गोड भूल
स्पर्श अनुभवावे
हाती हात असावे
हे स्वप्न नसावे ..
गोड तू बोलावे
तेच मी ऐकावे
बस समोर तू अशी
माझे गीत ऐकावे
----------------------------------
कविता - तुझी सोबत .
-अरुण वि.देशपांडे -पुणे.
9850177342
-------------------------------------