।मोबाइल।
पहले पत्र में लोग बात करते थे,
उसके बाद रेडियो
उसके बाद टेलीफोन
तब भी लोग अपने के लिए वक़्त निकाल लेते थे।
टेलीफोन में लोग १-२ घंटा बात करते थे
तब भी परिवार के साथ । साथ में बैठकर अपनी खुशी और गम की बात की जाती थी
*वो वक़्त भी क्या वक़्त था*
*जब परिवार के साथ बैठकर अपनी बातें सुनाई जाती थी*
उसके बाद आया मोबाइल।
परिवार को बिछड़ के रख दिया
दोस्त को चेट पर ले लिया
अपने को बातो में ले लिया
७-८ घंटे बात करके ज़िन्दगी को पिचाड़ दिया
मंज़िल मोबाइल पर पढ़ रहे है
रास्ते गूगल पर ढूंढ़ रहे है
*ए भी क्या वक़्त है*
*रास्ते गूगल पर ढूंढ़ लेते है*
*और विडियो देख कर भविष्य*
आज मोबाइल ने परिवार को अलग कर दिया
आज मोबाइल ने अपने को अपने आप से अलग कर दिया
आज मोबाइल ने वक़्त को भगवान से जुदा कर दिया
*वो भी क्या वक़्त था जब शाला से रूम छोड़कर मम्मी पापा से मिलने आते थे*
लेखक धवल रावल
चलाला
TRUST ON GOD