अभी अभी तो बारिशकी बूँदोने खिड़कियोंको छुआ है,
और वोहि बूँदोने मिट्टिके साथ मिलकर ये साज़िश की है.
ये बारिशका पानी भी वही है और मिट्टी की ख़ुश्बूभीभी,
अब तो लगता है ये बादल भी वही जो उस रात हमपे बरस रहा था.
लेकिन अफ़सोस ये वक़त वो नहीं है,
क्यूँकि आज तू यहाँ नहीं, पर मैं यही कही हूँ.
sk.