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सुबह का समय था । सभी स्टूडेंट्स क्लास मे बैठे किसी ना किसी बात पर चर्चा कर रहे थे। तभी चारू अंदर आई । उसने एक पेपर अपने हाथ मे ले रखा था। और वो पुरी क्लास को अधिकार से देखने लगी ।
उसे गंभीर देख सबका ध्यान उस पर चला गया। चारू कम ही सीरियस होती थी।
चारू ने गला साफ किया और बेलने लगी।
" डिबेट कॉम्पिटिशन के लिए फाइनल नेमस् आ गए है। और हमारी क्लास से बस एक स्टूडेंट का सिलेक्शन हुआ है। और वो है नैना मलौतरा! कॉग्रेंस नैना । कॉलेज खत्म होने के बाद एक्टिविटी एरिया मे चली जाना । वहा अमर सर के साथ डिबेट के लिए प्रिपेयर करना है । तो टॉपिक एंड ओल डिसाइड हो जाएगा । "
जैसु ही चारू चुप हुई शशांक ने आकर सीधा नैना को साइड हग किया। उसके चेहरे पर एक बडी सी मुस्कान थी।
" मुझे पता था तुम कर लोगी। अब और मेहनत करना है । "
वो नैना का सर किसी बडे भाई की तरह सहला दिया। नैना की आंखे भर्रा गई। पहला बार अपनत्व का आभास हुआ था उसे। उसने पलके झपकाते हुए मुस्कुरा कर शशांक को देखा।
नव्या जिसे इस बात से खासा अंतर नही पडा था वो शशांक और नैना को करीब देख परेशान हो गई। ना जाने क्यो उसे कुछ अच्छा नही लग रहा था। नव्या ने अपना सर झटका और दूसरी तरफ देखने लगी।
लेकिन रह रह कर उसकी नजर शशांक और नैना पर चली जाती।
चारू ने नैना और शशांक को गले लग देखा तो वो जल भून गई। उसने जहरीली निगाह शशांक पर डाली।
शशांक को अपने ऊपर तपती और गुस्से से भरी नजरो को आभास हुआ तो उसने पलट कर चारू की तरफ देखा। चारू जिस प्रकार उसे घूर रही थी उससे शशांक के पसीने छूट गए।
चारू ने आंखे गोल घुमाई और फिर सर घुमाकर नैना को देखा।
नैना ने जब उसकी आंखो मे देखा तो चारू इशारो मे चिल्लाने लगी।
" हट! दूर हट इससे ! तू मेरी बेस्टी है। दूर हट इस कलमुंहए से...!!!"
नैना ने सर ना मे हिला दिया और हँस पडी ।
जल कुकडी !
नैना के हँसते ही चारू चीढ गई। वो आगे बडी और अपना सी आर का सारा ओरा...एक तरफ छोड शश्क की तरफ बड गई।
उसने अपनी कमर.पर हाथ रख उसे घूरा तो शशांक ने आंखे गोल घुमा चारू के सर पर चपत लगा दी।
" होओओ....!!!", चारू की आंखे बडी हो गई और उसने बिल्ली की तरह अपना पंजा शशांक के कंधे पर चला दिया।
फिर उसने नैना का हाथ पकडा और पाउट करते हुए उसे अपने पास कर लिया।
जलन साफ नजर आ रही थी।
" कितना जलती हो बे तुम ! ", शशांक बोला।
" तुमसे मतलब चौहान । "
शशांक ने चारू की नाक दबा दी तो चारू नौटंकी करती हुई कुछ कदम पीछे हट गई।
नैना हँस दी।
" बस कर निरूपा रोए । "
" नैना अब तू भा । बस यही दोस्ती...यही प्यार ! ", चारू अपने नकली आंसू प्छ पलट गई और अगले ही पल उसका सर किसी दीवार जैसी चीज पर लगा। वो.लडखडा कर सामने की तरफ गिर गई।
नैना , शशांक और नव्या के साथ साथ पुरी क्लास सकता मे.पड गई। क्योकि चारू जिस पर गिरी थी वो और कोई नही.ब्लकी प्रोफेसर अमर राजपूत थे ।
इधर जमीन पर अमर के ऊपर पडी चारू की तो हवाईयां उड गई। उसका जबडा लटक गया। आंखे डर और हैरानी के .मिले जुले भाव से फैल गई।
" उफ्फ..मिस चारू ! ", अमर कराहया।
चारू झटके से दूसरी तरफ रोल होकर खडी हो गई। उसने इधर उधर देखा और फिर नव्या के पीछे छुप गई।
" ए..तुम हमारे पीछे छुप रही हो ? ", नव्या हल्के से बोली।
" तुम.तो सबकी बाप हो । ये सर के गुस्से से बचा लो मुझे नव्या । ", चारू नव्या के पीछे खुद को छुपाते हुए बोली।
नव्या ने एक भंव उडा दी।
" मतलब क्या है इस बात का ?!!"
" तुम थोडी डेंजरस टाइप होना । "
" तो ? "
" तो तुमसे तो प्रिंसिपल तक डरते है। तो अमर सर क्या ही बोल्गे। बचा वो हमको नव्या। "
" ए..तुम पागल वागल हो क्या। ."
नव्या अब चिढ गई थी। वो पलटी और उसने चारू को आगे कर.दिया।
चारू ने उसे ऐसे.देखा मानो नव्या ने उसे शेर के मुंह मे फेंक दिया हो। वैसे था भी कुछ ऐसा ही। क्योकि अमर उसे देख भी उतनी ही खुन्नस से रहा था।
चारू ने अमर को देखा और अगले ही पल —
" सॉरी सर !!!!!"
चारू ये चिल्लाकर भाग गई।
अमर का मुंह खुल गया ।
क्या बवाल.है ये लडकी !
वो बस इतना ही सोच पा रहा था।
क्रमशः