Quotes by Shivraj Bhokare in Bitesapp read free

Shivraj Bhokare

Shivraj Bhokare

@shivrajbhokare342239
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क्या जीवन की भागदौड़, तनाव, असफलता, रिश्तों की उलझन और मन की बेचैनी ने आपको कभी यह सोचने पर मजबूर किया है कि आखिर सच्चा समाधान कहाँ है? यह पुस्तक केवल गीता की व्याख्या नहीं, बल्कि आज के इंसान के जीवन का दर्पण है। इसमें हर अध्याय आपको स्वयं से मिलाने, सही दृष्टि देने और जीवन को नई दिशा में देखने का निमंत्रण देता है। यदि आप केवल पढ़ना नहीं, बल्कि अपने जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाना चाहते हैं, तो यह पुस्तक आपके लिए है।

गीता: आज के इंसान के लिए

✍️ Shivraj Bhokare

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🫵

यह तो बस एक झलक है…
ऐसी ही गहराई से भरी अनेक कविताओं, विचारों और आत्मा को स्पर्श करने वाले शब्दों को पढ़ने के लिए पढ़िए —
‘शब्द और सत्य’
मेरे द्वारा लिखित एक भावपूर्ण पुस्तक।
— शिवराज भोकरे.....✍️

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“शब्द और सत्य” — जल्द ही आ रहा है…
कुछ एहसास, कुछ कड़वे सच,
और कुछ ऐसे सवाल… जो आपको सोचने पर मजबूर कर देंगे।
तैयार रहिए…

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बेटी: पिंजरे की चिड़िया नहीं, आसमान की दावेदार

तू किसी के आंगन की बस शोभा नहीं,
तू 'पराया धन' होने का कोई धोखा नहीं।
तुझे सिखाया गया कि झुकना ही तेरी शान है,
पर याद रख, तेरे भीतर भी वही असीम आसमान है।

तुझे विदा करने की तैयारी बचपन से शुरू हुई,
तेरी बुद्धिमत्ता, बस चूल्हे और चौखट तक रुकी।
पर बेटी वह है, जो संस्कारों के जालों को काट दे,
जो अपनी नियति को खुद अपने हाथों से बाँट दे।

आचार्य कहते हैं—मत बना उसे विदाई की एक वस्तु,
उसे बना ऐसा कि वह सत्य के लिए हो सके प्रस्तुत।
उसे गहने नहीं, उसे 'ज्ञान' के हथियार दो,
उसे विवाह का डर नहीं, उसे 'विवेक' का विस्तार दो।

असली कन्यादान वह है, जहाँ अज्ञान का दान हो,
जहाँ बेटी के भीतर, उसके अपने 'स्व' का भान हो।
वह किसी की अर्धांगिनी होने से पहले 'पूर्ण' बने,
वह भीड़ का हिस्सा नहीं, खुद में एक संपूर्ण बने।

(आचार्य प्रशांत से प्रेरित)-Shivraj Bhokare..✍️

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सच्चा इंसान: जो दर्पण जैसा साफ हो

तुमने ओढ़ रखे हैं नकाब, शराफत और नेकी के,
पर भीतर पल रहे हैं कीड़े, लालच और बेरुखी के।
सच्चा होना वह नहीं, जो दुनिया को तुम दिखाते हो,
सच्चा होना वह है, जो तुम अंधेरे में खुद को पाते हो।

जो अपनी मान्यताओं को सत्य की आग में तपा सके,
जो अपने ही झूठ को देख, उसे जड़ से मिटा सके।
वह सच्चा है, जो समाज की भीड़ में खोया नहीं,
जो संस्कारों की लोरी सुनकर, चैन से सोया नहीं।

तुम सत्य बोलते हो ताकि तुम्हारी इज़्ज़त बनी रहे,
यह तो व्यापार है, ताकि दुनिया की नज़र तनी रहे।
सच्चा इंसान तो वह है, जिसे खोने का कोई डर नहीं,
जिसके अहंकार का अब इस संसार में कोई घर नहीं।

आचार्य कहते हैं—मत बनो 'अच्छा', बस 'सच्चे' बन जाओ,
इन थोपे हुए गुणों के बोझ से, तुम आज़ाद हो जाओ।
सच्चाई कोई मंज़िल नहीं, यह तो हर पल की लड़ाई है,
अपने ही भ्रमों को चीरकर, मिली हुई गहराई है।

(आचार्य प्रशांत से प्रेरित)-Shivraj Bhokare.. ✍️

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जीवनसाथी: साथी सत्य का, या मोह का?

तुम जिसे जीवनसाथी कहते हो, वह बस एक समझौता है,
अकेलेपन के डर से उपजा, एक झूठा भरोसा है।
तुमने उसे चुना ताकि कोई तुम्हारी आदतों को सह सके,
ताकि समाज की नज़रों में तुम्हारा घर 'पूर्ण' रह सके।

पर क्या वह साथी तुम्हें तुम्हारे 'स्व' से मिलाता है?
या तुम्हें संस्कारों की जंजीरों में और जकड़ता जाता है?
सच्चा साथी वह नहीं जो बस 'आई लव यू' कहे,
सच्चा साथी वह है, जो सत्य की राह पर अडिग रहे

अगर तुम्हारा साथ बस भोग और देह तक सीमित है,
तो समझो तुम्हारा प्रेम अभी बहुत ही संकुचित है।
साथी वह है जो तुम्हारी कमियों पर चोट करे,
जो तुम्हें मोह के दलदल से निकालने की ज़िद करे।

आचार्य कहते हैं—दो शरीरों का मिलना साथ नहीं होता,
जहाँ अहंकार न टूटे, वहाँ सच्चा हाथ नहीं होता।
साथी वही श्रेष्ठ है जो तुम्हें आज़ाद कर जाए,
जो तुम्हें खुद से छुड़ाकर, अनंत की ओर बढ़ाए।

(आचार्य प्रशांत से प्रेरित)-Shivraj Bhokare..✍️

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लड़की: देह नहीं, एक मुक्त चेतना

तुझे सिखाया गया कि तू 'पराई अमानत' है,
तेरी हया, तेरी चुप्पी ही तेरी सलामत है।
तूने मान लिया कि तेरा घर बस रसोई की दीवारें हैं,
पर तेरे भीतर भी तो सत्य की अनंत पुकारें हैं।

तू बेटी है, तू पत्नी है, तू किसी की कोमल छाया है,
पर याद रख, तू भी वही आत्मा है, जो परे ये माया है।
तुझे सजाया गया गहनों से ताकि तेरी बेड़ियाँ न दिखें,
तुझे पढ़ाया गया वही, जिससे तू बस समर्पण सीखे।

आचार्य कहते हैं—अपनी पहचान इन रिश्तों में मत ढूँढ,
तू सागर है अनंत, मत बन किसी की प्यास की बूँद।
असली सुंदरता वह नहीं, जो चेहरे पर झलकती है,
असली सुंदरता वह 'विवेक' है, जो भीतर दहकती है।

मत मांग किसी से सुरक्षा, तू खुद अपनी शक्ति बन,
इन झूठी मान्यताओं के विरुद्ध, एक गहरी क्रांति बन।
जिस दिन तूने शरीर होने के भ्रम को छोड़ दिया,
समझो उसी दिन तूने, सदियों का पिंजरा तोड़ दिया।

(आचार्य प्रशांत से प्रेरित)- Shivraj Bhokare

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