लड़की: देह नहीं, एक मुक्त चेतना
तुझे सिखाया गया कि तू 'पराई अमानत' है,
तेरी हया, तेरी चुप्पी ही तेरी सलामत है।
तूने मान लिया कि तेरा घर बस रसोई की दीवारें हैं,
पर तेरे भीतर भी तो सत्य की अनंत पुकारें हैं।
तू बेटी है, तू पत्नी है, तू किसी की कोमल छाया है,
पर याद रख, तू भी वही आत्मा है, जो परे ये माया है।
तुझे सजाया गया गहनों से ताकि तेरी बेड़ियाँ न दिखें,
तुझे पढ़ाया गया वही, जिससे तू बस समर्पण सीखे।
आचार्य कहते हैं—अपनी पहचान इन रिश्तों में मत ढूँढ,
तू सागर है अनंत, मत बन किसी की प्यास की बूँद।
असली सुंदरता वह नहीं, जो चेहरे पर झलकती है,
असली सुंदरता वह 'विवेक' है, जो भीतर दहकती है।
मत मांग किसी से सुरक्षा, तू खुद अपनी शक्ति बन,
इन झूठी मान्यताओं के विरुद्ध, एक गहरी क्रांति बन।
जिस दिन तूने शरीर होने के भ्रम को छोड़ दिया,
समझो उसी दिन तूने, सदियों का पिंजरा तोड़ दिया।
(आचार्य प्रशांत से प्रेरित)- Shivraj Bhokare