My Dear Professor - Part 30 in Hindi Love Stories by Vartika reena books and stories PDF | माई डियर प्रोफेसर - भाग 30

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माई डियर प्रोफेसर - भाग 30


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नव्या , चारू और शशांक तीनो कैंटीन मे बैठे थे। और चारू उन्हे प्ले की स्टोरी बता रही थी।



" मेल लीड आर्मी ऑफिसर है एंड फिमेल लीड फेमस क्लासिकल कोरियोग्राफर है। दे बोथ मेट इन आ इवेंट वेयर फिमेल लीड गोट हर पद्म श्री आवर्ड।  एंड दे बोथ फेल इन लव। इसके बाद इन वन मिशन मेल लीड डाइड । दैन फिमेल लीड स्टार्ट हैलयुसिनेटिंग हिम एंड इम वन परफार्मेस वाइल डांसिंग सी डाए ओलसो। तो ये है ड्रामा की स्टोरी। एंड डांस होगा बीच मे.क्लासिकल । दोनो प्रिपेयर करना। " 


चारू स्टोरी.समझाती हुई बहुत गंभीर थी। स्क्रिप्ट सुनकर नव्या और शशांक भौचक्के से उसे देख रहे थे।


नव्या ने अपनी कोहनी टेबल पर टिकाए आगे झुकी ," इसके हार्डकवर के रूप मे पब्लिश.करना पुरी डिटेल्स के साथ। दिस इज आ मास्टरपीस! " 


नव्या खासा प्रभावित थी चारू की लेखनी से और उसके कह नी सुनाने के ढंग से। 


तभी शशांक परेशान सा बोला ," कथक कैसे करूंगा? मुझे तो आता भी नही। " 


" मुझे आता है। मै सिखा दुंगी। ", नव्या पलके झपकाते हुए बोली।


शशांक और चारू चौक गए। 


" तुम्हे क्लासिकल डांस आता है ! " 


शशांक और चारू के मुंह.से एक साथ एक ही.बात निकली तो नव्या सर हिलाते हुए हल्के से हँस दी। 


" वैसे कहानी सुनकर ऐसा महसूस हुआ कि अलग होकर दोनो लीड शव है। ", नव्या बोली।


चारू मुस्कुरा दी। "तुम समझी इनके प्रेम को। मै चाहती हूं कि ये दोनो सिया राम जैसे प्रेम को दर्शाए तो दोनो अपनी एक्टिंग उसी तरह करना और डांस मे भावनाए दिखनी और.महसूस होनी चाहिए।  पता चला चाहिए आडियंस को। " 


" कथक बिना महसूस किए हो भी नही.सकता । और रही बात एक्टिंग की तो कल्चरल प्रोग्राम एक्जाम के बाद है। मतलब हमारे पास एक महीना है। " ,शशांक गंभीरता से.बोला। 


शशांक हमेशा से ही नई चीजे एक्सप्लोर करना चाहता था। स्वंय को टफ टाइम देता था ताकि ग्रो कर सके। 


" वैसे अगर कभी आर्मी जाइन करने के बात मे मर गया तो क्या जो मुझसे प्यार करेगी वो एसी ही प्रेम मग्न होगी मेरे लिए! अगर वो मुझे ऐसे प्यार नही कर सकती तो नही चाहिए।  " ,शशांक शरारत से बोला।


नव्या और चारू उसे अपलक देखने लगे। तभी नव्या ने टेबल पर हाथ मारा और उठ खडी हुई । उसने चारू के हाथ से स्क्रिप्ट छीनी और उसे गोल कर शशांक के सर पर दे मारी । 


शशांक भौचक्का सा रह गया। चारू मुस्कुरा दी।


" और मारो इसे नव्या । ज्यादा फालतू बकवास करता फिरता है। ", चारू नाराजगी से बौली। 



नव्या ने शशांक को मारने के लिए दोबारा हाथ उठाया ही था कि शशांक भाग कर दूर खडा हो गया। 


" दिमाग खराब है क्या ! मै मजाक कर रहा था। "


" ऐसा मजाक ! ", नव्या उसकी तरफ बडी, " तेरी तो.." 



शशांक ने दौड लगा दी। नव्या उसे मारने के लिए उसके पीछे भागी।



दोनो की हरकते देख चारू मुस्कुरा दी। उसने तीनो के सैंडविच के लिए पे किया और अपना सैंडविच मुंह मे भरकर बॉस्केटबॉल कोर्ट की तरफ बड गई । 




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शाम हो रही थी। अमर अपने घल के हॉल मे बैठा कुछ नोट्स बना रहा था। तभी उसके दरवाजे पर दस्तक हुई । 


अमर ने जाकर दरवाजा खोला। दरवाजा खुलते ही एक चंचल हवा का झोंका खिसक कर अमर से होते हुए घर मे घूस गया। अमर ने गहरी सांस भरी और , पसीना , पहली बारिश और कच्ची मिट्टी की गंध उसकी नाक से टकराई। 


अमर का चित्त मानो शांत हो गया हो। सहज हो गया हो। उसने सामने देखा..चारू खडी थी। उसने आज एक नीली शर्ट और वाइट पैंट पहना था । ये वही कपडे थे जो वो कॉलेज पहनकर आई थी। उसकी शर्ट कोने से निकली हुई थी। सलिवज कोहनी तक मोड रखी थी। बालो जुडे मे बंधे थे। मगर कुछ शरारती लटे उसकी कनपटी को चुमते हुए गर्दन तक पहुंच रही थी। 



वही हवा का झोंका फिर आया और शरारत करता अमर से होते हुए चारू को छू गया। चारू ने पलके उठाकर अमर को देखा और खो गई।


हमने उन्हे देखा तो पाया वो कही खोए हुए थे। निगाहे हमपर थी किंतु स्वंय ना जाने कहा थे। उनके शरीर की तपिश हम तक उस हवा के झोंके से पहुंच रही थी। पिता के आलिंगन मु जो गर्माहट होती है वैसी ही मगर कुछ अलग गर्माहट अमर की थी । मानो पास ना होकर भी वो हर मुहिबत का समाधान केवल अपने होने से ही कर दे। मेरे लिए आप कुछ इस तरह है मानो माता सती के महादेव। मेरे प्रियतम , मेरे अमर.....क्या आपको अपना कहने का अधिकार है हमे । बताओ ना..क्या आपसे.प्रेम पाने का अधिकार है। 




" आप फिर खुली आंखो से सपने देखने लगी मिस चारू ! ", अमर की आवाज जैसे ही चारू के कानो मे पडी वो मानो नींद से जागी हो। 


उसने पलके झपकाई और अपना सर झुका लिया। 


" सॉरी सर । " , वो बोली।


" आप कुछ खोई खोई सी लग रही है। क्या बात है ? कुछ परेशानी हो तो बता सकती है आप। मामी की बहन हो..मदद कर सकता हूं । ", अमर एक तरफ हटते हुए बोला।


उसने हाथ से चारू को अंदर आने का इशारा.किया।



चारू कान के पीछे उस बागी लटक को सवांरती अंदर आ गई ।


अमर.ने उसे देखा तो ना जाने क्यो उहका.दिल जोरो से धडकने लगा। उसने कसकर आंखे बंद कर ली।


" स्टुडेंट है वो ! " , अमर ने मन ही मन कहा। 




चारू ने अमर को देखा फिर जमीन की ओर। फिर झिझकते हुए बोली , " आपसे कुछ कहना था । " 


अमर चौंक गया। ना जाने क्यो उसे लगा चारू उस से जो कहना चाहती है वो जानता है। उसके खून मे उबाल आने लगा। 


ये आजकल के बच्चे..बडे होते नही.।और.प्यार के चक्कर मे पहले पड जाते है। 



उसने मन ही मन कहा। 


तभी चारू ने पलके उठाकर अमर को देखा और बोलने लगी, " सर मै कहना चाहती थी कि..मै आपसे.."


" बस!!!! " ,चारू अभी बोल भी पाती कि अमर दहाडा । 


चारू घबरा गई।  उसने पलके झपकाते हुए अमर को देखा। वो गुस्से से कांप रहा था। 





क्रमशः