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रात का समय था। नैना अभी भी सो रही थी। उसके सिराहने बैठा अमोघ सन्न था। उसके हाथ मे पकडा कागज हवा के कारण फडफडा रहा था। उसकी आंखे खाली थी और चेहरे पर कोई भाव नही था।
तभी दरवाजा खुला और चारू , शशांक और नव्या ने कमरे मे प्रवेश किया। चारू की आंखे लाल और सुजी हुई थी। वो लंबे लंबे डग भरते हुए बिस्तर के पास पहुंची और नैना के पैरो के पास बैठ गई। उसने बिस्तर पर सोती हुई नैना के देखा। एक बार फिर उसकी रुलाई फुट पडी।
" तू इतनी प्रॉब्लम मे थी और बताई भी नही नैना ! मै क्या पराई हो गई हूं ? मेरी नैना...जो हर मुसीबत मे मेरे साथ थी , उसकी समस्या के बारे मे मुझे जरा भी भनक तक ना थी! कैसी दोस्त हूं मै ? "
ये सब सोचते सोचते चारू के आंसू तेजी से बहने लगे। वो सिसक उठी। तभी किसी ने उसके कंधे पर हाथ रखा । उसने सर उठाकर देखा तो नव्या खडी थी। उसकी नजर भी नैना पर टिकी थी । वो शांत थी । होना भी था ! उसके अलावा यहा कोई था भी नही जो सब सभांल ले । नव्या ने अपनी पलके झपका दी। चारू को थोडा संबल मिला।
तभी नैना कुछ कसमसाई और फिर आंखे खोल दी। सब के सब अपने आंसू पोंछ नैना को देखने लगे।
नैना ने इधर उधर देखा तो पाया वो किसी नई जगह पर है। तभी उसकी नजर चारू पर पडी जो उसके पैरो के पास बैठी थी। वो उठ कर बैठ गई।
" चारू ! " , नैना ने चारू को पुकारा।
" हां ! " , चारू उसकी बगल मे आती हुई बोली।
नैना ने कुछ नही कहा, बस अपना सर चारू के कंधे पर टिका लिया।
" चारू..पता नही आजकल क्या हो रहा है ? मै चलते चलते खो जाती हूं ! समय का कुछ पता ही नही चलता । कब कहा आ गई...कुछ याद नही रहता । ये..ये क्या हो रहा है ? ऊपर से ये सर दर्द! आह...!!!!! "
नैना अपना सर पकडते हुई बोली। तभी दो हाथ आए और नैना के कंधो के ईर्द गिर्द कस गए। और झटके से लेकिन सभांल कर उसे अपनी तरफ खींच लिया। नैना का सर एक मजबूत सीने से जा लगा । वो हडबडाकर सर उठाने लगी तो बाहे और कस गई। इशारा साफ था ! वो ऐसे ही उसकी बाहो मे रहने वाली थी।
" अमोघ ! ", नैना ने हल्के से कहा।
अमोघ ने कसकर अपनी आंखे बंद कर ली। नैना अमोघ की बडती धड़कन सुन सकती थी । वो महसूस कर पा रही थी अमोघ का डर ! उसकी चिंता ! पर...वो.इतना घबराया हुआ क्यो है ?
" अमोघ क्या हुआ है ? क्यो परेशान हो ? ", वो ऐसे ही अमोघ के सीने से लगे पुछी।
अमोघ ने अपनी बाहो कसाव और बडा लिया और अपना चेहरा नैना के कंधो मे छिपा लिया।
शशांक, चारू और नव्या, तीनो ही अमोघ का डर समझ पा रहे थे। वो तीनो चुपचाप दोनो को देख रहे थे। नव्या की मुठ्ठी कस गई थी। वो अमोघ को इतना टुटा हुआ नही देख सकती थी !
" कोई बताएगा हुआ क्या है ? ", इस बार नैना तेज आवाज मे बोली। वो अमोघ से अलग हो गई थी और अब चारो को बारी बारी से देख रही थी।
किसी के मुंह से बोल ना फुटे। क्या बताते वो उसे ! और कैस बताते ? वो खुद इस बात पर भरोसा नही चाहते थे ।
" तुम मे से कोई कुछ बोल क्यो नही रहा ? हुआ क्या है ? कुछ तो बोलो ! भीत ( दीवार ) की तरह क्यो खडे हुए हो ? " , नैना चिढ कर बोली।
तभी नव्या आगे आई और उसने चारू को एक नजर देखा फिर गहरी सांस भर कर बोलना शुरू किया ।
" नैना...तुम घबराना मत! डरना मत ! शांती से सब सुनना । "
नैना के माथे पर बल पड गए। वही चारू ने उसका हाथ पकड लिया।
नव्या बिस्तर पर बैठ गई। उसने अमोघ के हाथ से रिपोर्ट्स ली और एक सरसरी निगाह डालकर , नैना को देखने लगी।
" तुम्हारे ब्रेन के मिडल सेलिबलम मे कलोट्स बन ने लगे है। अभी कम और छोटे है। तुम्हारी जो नसें है वो एक जगह इक्ट्ठा हो रही है। इसी वजह से तुम्हे ये सब प्रॉब्लम हो रही हैं । यही कारण है कि आजकल तुम चीजे भूलने लगी हो ! तुम्हे एहसास ही नही होता की तुम एक हि जगह पर कितना समय बिता देती हो ! जो नसे एक जगह इकठ्ठी हो रही है वो ठीक से सिग्नल नही पास कर पा रही इसलिए तुम्हारी मेमोरी पर असर पड रहा है। और सर दर्द कलोट्स के कारण है। "
Q
नव्या एक सांस मे सब कह गई। उसने एक बार भी नैना को नही देखा । हिम्मत ही नही थी !
नैना एक टक शुन्य मे ताकती रही । ऐसा लग रहा था मानो वो यहा पर है ही नही ।
कुछ देर बाद नैना उठी और चारू को देखकर बोली , " होस्टल चल ! "
चारू चौंक गई। वो नैना की तरफ बडी ।
" रात हो गई है। हॉस्टल के गेट्स बंद हो गए होंगे ! " , चारू नैना का गाल सहलाते हुए बोली।
नैना ने ना मे सर हिला दिया ।
" वॉर्डन से मै बात कर लुंगी ! तू चल मेरे साथ ! ", वो उतावली होती हुई बोली।
" नैना..तुझे अभी आराम करना है ! "
" और मै वो किसी और के घर मेरी करने वाली ! "
" नैना !! "
पर नैना चारू को अनसुना कर कमरे के दरवाजे की तरफ बड गई। वो अभी कमरे से निकल भी पाती की उसने महसूस किया कि वो हवा मे है ।
उसने हैरत भरी सांस खींची और देखा कि अमोघ ने उसे अपनी गोद मे उठा लिया है ।
नैना ने प्रतिरोध करने के लिए मुंह खोला ही था कि अमोघ ने अपनी गहरी काली निगाहे उस पर डाल दी। वो चुप हो ।
साफ था वो आज रात यही रहने वाली थी और अमोघ उसे जाने नही देगा।
तभी नव्या ने चारू के कंधे पर हाथ रखा और साथ मे बाहर चलने का इशारा किया। मतलब साफ था — इस समय नैना और अमोघ को अकेले छोड देना ही बेहतर होगा।
वो दोनो बाहर निकल गई और उनके पीछे शशांक भी निकल गया ।
शशांक सिडियो की तरफ बड गया । उसने कुछ कदम ही लिए होंगे की नव्या ने उसकी हथेली मे अपनी हथेली डाल , उसे रोक लिया । शशांक को अपने शरीर मे झुरझुरी सी महसूस हुई । उसने पलट कर नव्या को देखा। वो उसके बेहद करीब खडी थी । एक बार फिर उसकी नजर नव्या की ठुड्डी पर बने तिल पर चली गई। उसका गला सुनने लगा। उसने जल्दी से अपनी नजरे नव्या की नजरो पर टिका दी । लेकिन उसकी मरी किस्मत! नव्या की आंख के नीचे मी एक तील था जो शशांक के दिल की धड़कन बडा रहा था ।
" क.क्या ? ", वो बडी मुश्किल से बोला ।
" आज रात यहा रूक जाओ! कल चले जाना ! ", नव्या शांती से बोली।
शशांक ने गर्दन हां मे हिला दी । उसे पसीना आने लगा था । लग रहा था कि और दो सेकेंड नव्या ऐसे उसका हाथ पकडे , उसके इतने करीब खडी रही तो वो अभी बेहोश हो जाएगा।
वही इन दोनो को देखती हुए चारू मुस्कुरा दी । उसने एक नजर कमरे के दरवाजे पर डाली । अंदर अमोघ और नैना थे ।
उसने ना मे सर हिला दिया ।
" जहां देखो वहां प्रेम के पंछी है ! एक हम ही अकेले है यहा !"
इतना कहकर वो.हँस दी ।
क्रमशः