Mahashakti - 35 in Hindi Mythological Stories by Mehul Pasaya books and stories PDF | महाशक्ति - 35

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महाशक्ति - 35


🌺 महाशक्ति – एपिसोड 35

"भविष्य का रहस्य और छाया की चाल"


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🕯️ भूमिका

जब लगता है कि अंधकार मिट गया है, तब उसकी परछाईं सबसे लंबी होती है।
अर्जुन और अनाया ने प्रेम और शक्ति से वज्रकेश को हराया — लेकिन जो आने वाला है, वह किसी राक्षस से नहीं, बल्कि काल से जुड़ा है।


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🌌 तपस्थल की नई सुबह

अर्जुन और अनाया अब रोज़ सुबह बालक के साथ साधना करते।
उसका नाम उन्होंने रखा — ‘ओजस’
क्योंकि उसकी आँखों में ओज था, मौन में मंत्र था, और चाल में ब्रह्मज्ञान।

ओजस दिनभर कुछ नहीं बोलता — लेकिन वो ध्यान में बैठता, शिवलिंग को निहारता और हर छोटी चीज़ में भी ऊर्जा खोज लेता।

गाँव के लोग अब ओजस को पूज्य भाव से देखने लगे थे।


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🧙‍♂️ गुरु की चेतावनी

एक दिन गुरुजी ने अर्जुन और अनाया को अकेले बुलाया।

"ओजस केवल बालक नहीं… वह एक द्वार है — भविष्य के एक ऐसे सत्य का, जो अभी इस युग के लिए समयपूर्व है।"

अनाया चिंतित हुई:
"क्या उसका आना ठीक नहीं था?"

गुरु बोले:
"उसका आना नियति का संकेत है…
और ये भी कि अंधकार फिर से आकार लेने वाला है —
इस बार वह केवल एक राक्षस नहीं, बल्कि छाया है।"


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🌑 छाया का प्रकट होना

इसी रात, शिवशक्ति तपस्थल के बाहर अचानक हवाएं तेज़ हुईं।
पक्षी चिल्लाने लगे, पेड़ झुकने लगे, और मंदिर के दीपक बुझ गए।

एक गहरी, काली परछाईं प्रकट हुई —
ना शरीर, ना चेहरा — बस एक भयानक मौन उपस्थिति।

वह तपस्थल के द्वार पर ठहरी रही… और धीरे से बोली:

"मैं हूँ छाया…
जो हर युग के अंत में जन्म लेती है।
मैं वही ऊर्जा हूँ जो वज्रकेश को शक्ति देती थी…
अब उसका उत्तराधिकार मैं लूँगी।"


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⚡ अर्जुन और अनाया का सामना

अर्जुन और अनाया दोनों बाहर आए।
उन्होंने मंत्रोच्चारण शुरू किया —
"ॐ नमः शिवाय… ॐ आदिशक्त्यै नमः…"

लेकिन छाया उन पर असर नहीं ले रही थी।

"मंत्रों से मुझे नहीं हराया जा सकता।
क्योंकि मैं भाषा नहीं, भावनाओं से जन्मी हूँ।
जैसे तुम्हारे भीतर भय होगा — मैं और बलवान हो जाऊँगी।"

और फिर वो गायब हो गई।


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🌌 ओजस की पहली भविष्यवाणी

अगली सुबह, ओजस ने पहली बार स्पष्ट शब्दों में कुछ कहा:

"माँ, पिता…
अब जो आएगा, वह मन से लड़ेगा, हथियार से नहीं।
अगर डर गया कोई भी, तो छाया अमर हो जाएगी।"

अर्जुन चौंक गया:
"तुम यह कैसे जानते हो?"

ओजस ने अपनी आँखें बंद कीं —
"मैं वो हूँ जो सात युगों के बीच जन्मा है।
मेरे जन्म के साथ ही सात ताले खुलते हैं…
और पहला ताला अब खुल चुका है।"


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🧿 अनाया का सपना – सप्तकुलों का रहस्य

अनाया को रात में एक भयानक स्वप्न आया —
सात दीप जल रहे थे, और हर दीप के पीछे एक कुल खड़ा था —

राक्षस कुल

मानव कुल

गंधर्व कुल

नाग कुल

असुर कुल

देव कुल

और एक सातवाँ… अनाम कुल।


तभी एक आवाज़ आई:
"इन सात कुलों का संतुलन ही ब्रह्मांड की गति है।
जिस दिन यह संतुलन टूटा, उस दिन…
महाप्रलय होगा।"


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🛕 तपस्थल में ऊर्जा की असमानता

कुछ दिन बाद तपस्थल में अजीब घटनाएँ होने लगीं:

शिवलिंग पर जल चढ़ाने के बाद वह खुद ही सूख जाता

तुलसी के पौधे मुरझा रहे थे

मंदिर की घंटियाँ बिना हवा के बजने लगतीं


गुरुजी बोले:
"ये सब इस बात के संकेत हैं कि छाया अब भीतर घुसने लगी है।
हम सबको आत्म-रक्षा के नए मार्ग खोजने होंगे।"


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🔥 ओजस की शक्ति का पहला प्रकटन

एक दोपहर एक ग्रामीण बालक खेलते हुए तपस्थल के कुएँ में गिर गया।
भीड़ जमा हो गई, कोई उसे निकाल नहीं पा रहा था।

तभी ओजस आया — शांत, स्थिर।

उसने कुएँ की ओर देखा और आँखें बंद कीं।
उसके हाथों से एक नीला प्रकाश निकला — और बालक धीरे-धीरे कुएँ से ऊपर उठने लगा।

सभी स्तब्ध रह गए।

ग्रामीणों ने कहा —
"ये कोई बालक नहीं… ये अवतार है।"


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☯️ अर्जुन का द्वंद्व

अर्जुन धीरे-धीरे भीतर से असहज महसूस कर रहा था।

"क्या मैं इस युग के लिए पर्याप्त हूँ?"
"जब मेरा पुत्र ही मुझसे शक्तिशाली है, तो मैं उसका रक्षक कैसे बनूँ?"

गुरुजी ने उसे शांत किया —
"तू केवल योद्धा नहीं, वह बीज है जिससे ओजस जैसे वृक्ष की जड़ें मजबूत होती हैं।
वो ऊँचा उड़ पाए, इसलिए तू धरती बन।"


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🪔 शिव-पार्वती का संकेत

रात को मंदिर के शिवलिंग से एक मधुर घंटनाद निकला।

तपस्थल में एक दिव्य आभा फैल गई।

एक आवाज़ गूँजी —

> "महाशक्ति जाग चुकी है।
अब छाया को हराने के लिए
केवल शक्ति नहीं,
सात कुलों का संघ चाहिए।"



अर्जुन, अनाया और गुरुजी — तीनों समझ गए:
अब उन्हें अपने तपस्थल की सीमाओं से बाहर जाकर,
अन्य कुलों को एक करना होगा।


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📜 यात्रा की शुरुआत

गुरुजी बोले:
"अब समय है कि अर्जुन, अनाया और ओजस — तीनों
यात्रा पर निकलें।
हर कुल का प्रतिनिधि तुम्हारे साथ आएगा…
और तब ही छाया पर विजय संभव होगी।"


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✨ एपिसोड 35 समाप्त