आदिकाल से ही भारत देश में, जीवन के हर क्षेत्र में, असाधारण व्यक्तियों का प्रादुर्भाव होता रहा है। हमारा इतिहास ऐसे महान लोगों के नामों से भरा पड़ा है; जिनकी कला, साहित्य, राजनीति, विज्ञान और अन्य क्षेत्रों में महत्वपूर्ण देन रही है। कितनों के नाम तो घर-घर लोगों की जुबान पर हैं। इनमें से बहुत-से व्यक्ति ऐसे हैं जिनका सिर्फ नाम ही लोग जानते हैं, उनके जीवनवृत्त और कार्य के बारे में लोगों की जानकारी बहुत कम है। कुछ ऐसे भी हुए हैं जिनकी उपलब्धियाँ तो असाधारण हैं, किंतु उनके संबंध में लोगों का ज्ञान न के बराबर है।
किसी देश का इतिहास, बहुत अंशों में, उसके उन महान, नर-नारियों का इतिहास है। जिन्होंने उसे गढ़ा, सँवारा और उसका विकास किया। आज समय आ गया है कि हमारी युवा पीढ़ी भारत की इन विभूतियों के बारे में कुछ जाने, ताकि वह समझ सके कि हमारे देश का विकास किस प्रकार हुआ।
तो दोस्तो, आज से हम जिस इतिहास पुरुष के बारे में जानने जा रहे है उस वीर सपूत को रणजीत सिंह, महाराजा रणजीत सिंह, सरकार खालसा, सिंघ साहब, शेर-ए-पंजाब जैसे नामो से जाना जाता है। एक विशाल खालसा राज चलाने वाला ये इतिहास पुरुष करीब सवा दो सौ साल पहले पंजाब की धरती पर जन्मा था। इस वीर की प्रभुसत्ता को अंग्रेजो ने भी स्वीकारा एवं जिनके जीते-जी अंग्रेजो ने पंजाब की तरफ आँख उठाने की जुर्रत तक नही की। एक ऐसा मौका भी आया था जब पंजाब ही एकमात्र ऐसा सूबा था, जिस पर अंग्रेजों का कब्जा नहीं था।
ब्रिटिश इतिहासकार जे.टी.व्हीलर के मुताबिक तो “अगर रणजीत सिंह एक पीढ़ी पुराने होते, तो पूरे हिंदूस्तान को ही फतह कर लेते।”
महाराजा रणजीत सिंह एक महान शासक थे। जिनका नाम भारतीय इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा गया है। शुरू-शुरू में वह एक मामूली सरदार थे, पर धीरे-धीरे उन्होंने अपने लिए एक ऐसी सल्तनत गढ़ डाली जिस पर किसी को भी नाज हो सकता था। उन्होंने पंजाब को राष्ट्र का रूप दिया और सचमुच ही एक ऐसा धर्म-निरपेक्ष राज्य गढ़ डाला जहाँ मुसलमानों तक को मंत्री, सलाहकार और सेनापति—जैसे ऊँचे-ऊँचे पद दिए गए। उन्होंने मस्जिदें बनाईं और सिखों के तीर्थस्थानों में भेंट चढ़ाने के साथ-साथ हिंदुओं के मंदिरों में भी माथा टेका। वह कोरे योद्धा ही नहीं थे। अपनी राजनीतिक चतुरता के बल पर वह, जब तक जिए, अंग्रेजों के विस्तार को रोके रहे। अफसोस यही है कि जो कुछ उन्होंने गढ़ा था उसे चिरस्थायी बना सकने के पहले ही वह इस दुनिया से कूच कर गए और उनकी सल्तनत उनके बाद ज्यादा दिन टिकी नहीं रह सकी।
To be continued..
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महाराजा रणजीत सिंह एक महान शासक थे। जिनका नाम भारतीय इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा गया है। शुरू-शुरू में वह एक मामूली सरदार थे, पर धीरे-धीरे उन्होंने अपने लिए एक ऐसी सल्तनत गढ़ डाली जिस पर किसी को भी नाज हो सकता था। उन्होंने पंजाब को राष्ट्र का रूप दिया और सचमुच ही एक ऐसा धर्म-निरपेक्ष राज्य गढ़ डाला जहाँ मुसलमानों तक को मंत्री, सलाहकार और सेनापति—जैसे ऊँचे-ऊँचे पद दिए गए। उन्होंने मस्जिदें बनाईं और सिखों के तीर्थस्थानों में भेंट चढ़ाने के साथ-साथ हिंदुओं के मंदिरों में भी माथा टेका। वह कोरे योद्धा ही नहीं थे। अपनी राजनीतिक चतुरता के बल पर वह, जब तक जिए, अंग्रेजों के विस्तार को रोके रहे। अफसोस यही है कि जो कुछ उन्होंने गढ़ा था उसे चिरस्थायी बना सकने के पहले ही वह इस दुनिया से कूच कर गए और उनकी सल्तनत उनके बाद ज्यादा दिन टिकी नहीं रह सकी।
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