MAHAASHAKTI - 18 in Hindi Mythological Stories by Mehul Pasaya books and stories PDF | महाशक्ति - 18

Featured Books
Categories
Share

महाशक्ति - 18

महाशक्ति – एपिसोड 18

"बढ़ती नजदीकियाँ और अनजाना डर"

सूरज धीरे-धीरे पहाड़ों के पीछे छिप रहा था। आसमान सिंदूरी रंग से भर गया था। ठंडी हवाएँ बह रही थीं, और मंदिर के पास स्थित झरने से आती पानी की आवाज़ पूरे वातावरण को शांतिमय बना रही थी। अर्जुन और अनाया पास के एक बड़े पत्थर पर बैठे हुए थे।

शिव जी की छाया में

अनाया ने ऊपर देखा, मंदिर की घंटियाँ हल्की-हल्की बज रही थीं।
"अर्जुन, क्या तुम्हें कभी ऐसा महसूस हुआ है कि हमारा मिलना सिर्फ एक संयोग नहीं था?"

अर्जुन ने उसकी आँखों में देखा।
"हाँ, कई बार। ऐसा लगता है कि कोई शक्ति हमें बार-बार पास ला रही है। शायद ये शिवजी की ही माया है।"

अनाया हल्के से मुस्कुरा दी।
"क्या तुमने कभी सोचा है कि हमारे जीवन की राहें किस दिशा में जाएँगी?"

अर्जुन ने गहरी साँस ली।
"हमारे हाथ में सिर्फ वर्तमान है, भविष्य का पता नहीं। लेकिन एक बात तय है—तुम्हारे बिना मेरी राह अधूरी लगेगी।"

अर्जुन की बेचैनी

अर्जुन के मन में कुछ अजीब सा चल रहा था। उसे कल रात सपना आया था कि कोई काली छाया अनाया की ओर बढ़ रही थी। उसने अनाया को बचाने की कोशिश की, लेकिन वह शक्ति इतनी प्रबल थी कि उसने अर्जुन को दूर फेंक दिया। सपना इतना सजीव था कि वह अब भी उसके बारे में सोच रहा था।

"अर्जुन, क्या हुआ? तुम कुछ परेशान से लग रहे हो?" अनाया ने अर्जुन के चेहरे के बदलते हाव-भाव को नोटिस किया।

"नहीं… बस कुछ खयालों में खो गया था," अर्जुन ने तुरंत कहा।

संग बिताए कुछ हल्के-फुल्के पल

अर्जुन ने माहौल को हल्का करने के लिए बात बदल दी।
"तुम्हें पता है, तुम्हारी जिद और हठ मुझे कभी-कभी परेशानी में डाल देती है?"

अनाया हँस पड़ी।
"ओह, तो अब तुम्हें मेरी जिद से दिक्कत हो रही है?"

"दिक्कत नहीं, बस थोड़ा डर लगता है कि कहीं तुम मुझे भी अपनी जिद के जाल में न फँसा लो!"

अनाया ने उसकी ओर शरारती अंदाज में देखा।
"अब तो तुम्हें मेरी आदत डालनी ही पड़ेगी, अर्जुन!"

दोनों खिलखिलाकर हँस पड़े। यह हँसी उनके रिश्ते को और गहरा कर रही थी।

अनजानी आशंका

रात के समय जब दोनों अपने-अपने शिविर में आराम कर रहे थे, अर्जुन की बेचैनी और बढ़ गई। वह शिव मंदिर में गया और शिवलिंग के सामने बैठ गया।

"हे महादेव, मुझे मार्गदर्शन दीजिए। मैं अनाया की रक्षा करना चाहता हूँ, लेकिन कहीं न कहीं मुझे महसूस हो रहा है कि कोई खतरा हमारी तरफ बढ़ रहा है।"

तभी मंदिर की ज्योत अचानक तेज़ हो गई, और एक हल्की-सी गूँज अर्जुन के कानों में पड़ी—
"तुम्हारी परीक्षा अभी बाकी है, अर्जुन। प्रेम की राह आसान नहीं होती।"

अर्जुन की आँखें चौड़ी हो गईं। यह इशारा था कि आने वाले दिन कठिन होने वाले हैं।

अगले दिन की सुबह

अर्जुन जब अनाया के पास पहुँचा, तो उसने देखा कि वह किसी फूल को निहार रही थी। सूरज की किरणें उसकी मुस्कान को और उज्जवल बना रही थीं। अर्जुन ने एक पल के लिए सब कुछ भुला दिया और बस उसे देखता रहा।

"क्या देख रहे हो?" अनाया ने मुस्कराते हुए पूछा।

"बस… तुम्हें," अर्जुन ने धीरे से कहा।

अनाया हल्के से शरमा गई।

एक नया अध्याय शुरू होने को था…

पर उन्हें यह नहीं पता था कि यह सुंदर पल जल्द ही एक तूफान में बदलने वाला था। अनाया के जीवन पर मंडराते खतरे की आहट अब और भी तेज़ हो गई थी…

(अगले एपिसोड में – क्या अर्जुन शिवजी की भविष्यवाणी को समझ पाएगा? क्या अनाया का जीवन सुरक्षित रहेगा? जानने के लिए पढ़ते रहिए… 'महाशक्ति'!)